(Vinod kushwaha) Born in Eastern UP, a microbiologist by profession and unseen storyteller by soul, I walk where science and literature walk the dusty roads together, weaving unseen stories.
Monday, October 2, 2023
Autumn And Memories
The autumn is for the those who find beauty in the end, I think this season is for memory, Because I feel and observe it's, it's always brings a memory with sadness, love, i think people always talking about his past days of past life in this season, autumn is a season of spectacularly sad love, Every poem on autumn is filled with only love with sadness.
Monday, September 11, 2023
Maturity with growing
The older you get, the more you choose
calm over chaos and distance over
disrespect. Drama becomes intolerable to
you and your peace becomes your ultimate
priority. You start surrounding yourself with
people who are good for your mental health,
heart and soul. This is how you know you
are growing.
Sunday, July 30, 2023
अल्हड़ सी ख्वाहिशें
वो लड़के/लड़कियाँ जो गाँव की
पगडण्डी से निकलकर नापते
है शहर का रास्ता..
वो लड़के लड़कियाँ जो उधारी पर
काटते हैं अपने दिन, कभी किताबों
के लिए, तो कभी परीक्षा के फॉर्म
के लिए,
वो जो हिचकिचाते हैं माँगने में पैसा माँ
बाबा से समझते हुए घर के हालात।
वो जो सपने पालते है कुछ कठिन। और उनको पुरा करने के लिए जी जान लगा देते हैं। वो जो समोसे पकौड़े और खिलौने की पैसे को इकठ्ठा कर के खरीदते हैं किताबें। ऐ लड़के लड़कियों जब जीतते हैं न। तो सिर्फ वो नहीं जीतेते.
उनके साथ जीतता है उनका गाँव, माँ और बाबा की मजबूरीया' और उनका पूरा संसार अतीत के अंधेरे में इक दीप होती हैं इनकी जीत। और ये जब हारते हैं न तो बिल्कुल शांत से हो जातें हैं। और जीने लगते हैं एकान्त और उदासियां लेकर। कहीं मजदूरी करते हुए उन्हीं अतीतों के साथ की किसी को फिर खिलौने बेच के किताबें न खरीदेंने न पड़े। ऐ चहरे पे मुस्कान के साथ इक घाव लिये जीते हैं।
Saturday, July 8, 2023
1 जुलाई
एक जुलाई वो तारीख़ थी जिसको खिसकाने की
लाख कोशिश के बावजूद भी 1 जुलाई को स्कूल खुल जाता था।
बदलते मौसम और बारिश के हल्के हल्के फव्वारे और खेत में धान कि रूपाई देख कर ईक अजीब सा डर लगने लगता था। ऐसे लगता था कि स्कूल जाने का मौसम आ ही गया है। क़रीब तीन महीने की छुट्टी के बाद हाथ को क्रिकेट वाला बैट पकड़ने की इतनी आदत हो चुकी होती थी कि पेन की ग्रिप बनने में जुलाई बीत जाता था।
एक जुलाई को सब कुछ नया हो जाता था ।
ज़िन्दगी में एक जुलाई से सब कुछ नया हो जाना
चाहिये किताबें, क्लास, जगह, बातें....सबकुछ।
Thursday, June 1, 2023
ख्वाबों के अवशेष
इक जगह जहां आप बड़े सपने देखते हुए बड़े हुए हैं।
वो सपने जो अधूरे रह गये हैं। जब भी उस जगह पे वापस आओगे। सपने वैसे ही जिन्दा मिलते हैं कहीं अलमारियों में कहीं बरामदे में कहीं किसी टेबल पर पड़े हुए। कभी कभी सोचता हूं उन सपनों का क्या जो जड़ें की रात में भीगते हुए बरसात में जुन की गर्मी में देखें थे। सोचता हूं जगह छोड़ते ही सपने भुलते गये। सोचता हूं वो सपने वापस गाव आने पे ही क्यों जिन्दा हो जातें हैं। शायद सपने यादें और जगह ये तीनों परस्पर जुड़े हुए हैं। अगर हम सपने की बात करें तो गांवों मे टुटी चारपाई पर लेटा हुआ बचा चंद को देखता है। और चांद पर जाने की तमाम तरीके के बारे में सोचता है। ग़रीबी और कम संसाधनों मे जो सपने आते हैं न वो अमीरों के घर में नहीं आते। इतिहास गवाह है बड़े से बड़े साइंटिस्ट बदतर हालातों में रह कर कुछ ऐसा दिया हैं संसार को की सदियों तक रिसर्च चलता रहेगा। सपने की बात करें तो बहुत बड़े बड़े सपने इन गांव के गलियारों में दफ़न हो जातें हैं । और सपने देखने वाला दो वक्त की रोटी कमाने मे लग जाता है। सपने हकीकत और हम पिछरेपन का तमगा लिए जीते हैं अधुरेपन इक अवशेष सा है जो दफ़न है कहीं कहीं न कहीं।
*VinodkushwahaBlogs*
Thursday, April 27, 2023
तजुर्बा और कांफिडेंस
अब आदमी समय के उस पड़ाव में आ गया है कि जब कभी कुछ चीजें जिन्दगी को डिस्टर्ब करतीं हैं। या कोई समस्या होती है! तो आदमी साइलेंट मोड में आ जाता हैं। और एकान्त में बैठकर जिन्दगी में चल रही उथल पुथल को बैलेंस करने की कोशिश करता है। कभी कभी लगता हैं एकान्त ही समस्याओं का निदान है। अब किसी से राय ने लेकर खुद की विचारधारा पे आगे बढ़ने में ही सुकून लगता है। कहीं न कहीं ऐसा लगता हैं उम्र के साथ हमारे अन्दर कॉन्फिडेंस कि कमी नहीं रह गयी है अब। अब ख़ुद कि विचारो पे विश्वास होने लगा हैं। ऐसा लगता हैं जिन्दगी को करीब से समझने के बाद कांफिडेंस की कमी नहीं रह जाती हैं। तजुर्बा कांफिडेंस कि जननीं हैं। अब लगने लगा है
Tuesday, April 4, 2023
बीतते वक्त
सुख के लम्हें तक के पास
पहुँचते पहुँचते हम उन लोगों से
जुदा हो जाते हैं,
जिनके साथ हमनें दुख झेलकर
सुख का स्वप्न देखा था।
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