Sunday, May 10, 2026

निस्वार्थ

कॉलेज के दिनों मे रात 01:00 बजे तक आटा के लोईयों के साथ मां का इंतजार करते देखा इंतजार बस इसलिए था कि कही रोटियां बन जाए तो ठंडी न हो जाएं। सुबह 4 बजे उठने से पहले मां का 03:00 जगा हुआ पा के यही समझ आया। बच्चों का संघर्ष में कहीं जयादा होता है। उनके मां का संघर्ष जो निस्वार्थ चलता रहता है, बस इसी उम्मीद में की बेटा बड़ा हो जाए तो अच्छे से कमा खा सके। ताप्ती धूप में कड़ी मेहनत करते हुए इंसान को बस मां नहीं देख सकती। बाकि इस दुनिया में किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ता, 

Wednesday, May 6, 2026

निराश्रित लड़के

एग्जाम हाल के बाहर। काफी गाड़ियों खड़ी रहती थी, किसी के पापा, तो किसी के भाई, किसी के मां, किसी की पूरी फैमिली खड़ी रहती थी, लेने के लिए। उसी एग्जाम हाल से कुछ ऐसे लड़के निकलते थे, जिन्होंने पूरी रात रेलवे स्टेशन पर लेट के जाग के बिताई होती थी। वो भी निकलते थे उसी एग्जाम हाल से आधी नींद पूरी सपने लिऐ उन्हें कोई नहीं आया होता था लेने, ये वो लोग है जो कभी मायूस हुए ही नहीं, जो मिला जितना मिला जीने लगे एक उमर के बाद।

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