Friday, October 30, 2026

मौसमी यादें

जैसे सर्दी का एहसास होते ही सरीसृप धीरे-धीरे
अपने घोंसलों, अपने बिलों में लौट जाते हैं,
कुछ महीनों के लिए, एक लंबी नींद के लिए;

जैसे अक्टूबर आते ही हवा में कुहासे का पहला संकेत उतर आता है,
जैसे लोग धीरे-धीरे अपने वस्त्र बदलने लगते हैं,

वैसे ही कुछ यादें भी लौट आती हैं।

कुछ यादों के चले जाने के बाद,
कुछ नई यादें वापस आ जाती हैं।

कुछ अतीत मौसम बनकर लौटते हैं —
मौसम के साथ आते हैं, और मौसम के साथ ही चले भी जाते हैं।

और कुछ यादें... मौसम से ही चिपक जाती हैं।
वो हर साल आती हैं, उसी कुहासे के साथ, उसी सर्द हवा के साथ,
और फिर उसी तरह चुपचाप लौट भी जाती हैं।

तब समझ आता है —
दुःख भी कई बार स्थायी नहीं होता,
वो भी  सीजनल हो जाता है।

© Author: Vinod Kumar Kushwaha

व्यवहारिक तौर पर प्रेम

व्यवहारिक तौर पर प्रेम को वो लड़के
कभी प्रकट ही नहीं कर पाए,
जिनके शरीर पर सिले हुए,
सिकुड़े कपड़े और पैरों में टूटी चप्पल थी
क्लासरूम के अंदर,
गरीबी प्यार करने की इजाज़त नहीं देती,
गरीब प्यार करके बस मारा जाता है।

Tuesday, September 22, 2026

बचपन और खिलौने

 खिलौनों को दूर से देखकर बिन खिलौनों के खेलने वाले बच्चे, जब बड़े हो जाते हैं तो, 
फिर किसी और बच्चे को खिलौनों की तरफ दूर से देख के खेलते हुवे नहीं देख पाते।

" समान घटनाएँ, समृद्धियों को पलक झपकते ही वापस ला देती हैं।

Tuesday, September 8, 2026

व्यवहारिक तौर पर प्रेम सबकुछ देखता है।

व्यवहारिक तौर पर प्रेम को वो लड़के
कभी प्रकट ही नहीं कर पाए,
जिनके शरीर पर सिले हुए,
सिकुड़े कपड़े और पैरों में टूटी चप्पल थी
क्लासरूम के अंदर,
गरीबी प्यार करने की इजाज़त नहीं देती,
गरीब प्यार करके बस मारा जाता है।

Vinod Kushwaha
A few things from My diary
:- Search on Google: Blogger Vinod Kushwaha

मौन और त्रासदी

झीलें, नदियाँ और समुद्र त्रासदी के बाद
फिर वैसे ही शांत होकर बहने लगते हैं,
जैसे कुछ हुआ ही न हो।

पहाड़ और नदियाँ सिखाती हैं— शांत रहना,
सुकून देना कमजोरी नहीं होता।

शांत सी दिखने वाली हर चीज़ के अंदर एक त्रासदी
छुपी होती है, जो वक़्त बे वक़्त कभी भी प्रलय में तब्दील हो जाती है।

— Vinod Kushwaha —
a few things from my diary.

दुनियां हादसों से ही बनी है

हादसे होना लाज़िम है। दुनियां हादसों से ही बनी है। कई हादसों ने इस दुनियां को अलग अलग रंग जगह पहचान दी है। हर हादसे के बाद दुनियां एक नई सीख के साथ जीना शुरू करती है। जो सबसे अलग होता है। हादसे कुछ मिटा के कुछ नया बनाने का एक प्रक्रिया है जो निरंतर चलती रहेगी। जैसे हम ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिख के सीख के मिटा के कुछ नया लिखते है।

Author: Vinod Kushwaha
A Few Things From My Diary

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मौसमी यादें

जैसे सर्दी का एहसास होते ही सरीसृप धीरे-धीरे अपने घोंसलों, अपने बिलों में लौट जाते हैं, कुछ महीनों के लिए, एक लंबी नींद के लिए; जैसे अक्टूबर...