A Few Things From My Diary
(Vinod kushwaha) Born in Eastern UP, a microbiologist by profession and unseen storyteller by soul, I walk where science and literature walk the dusty roads together, weaving unseen stories.
Saturday, September 26, 2026
Tuesday, September 22, 2026
बचपन और खिलौने
खिलौनों को दूर से देखकर बिन खिलौनों के खेलने वाले बच्चे, जब बड़े हो जाते हैं तो,
फिर किसी और बच्चे को खिलौनों की तरफ दूर से देख के खेलते हुवे नहीं देख पाते।
" समान घटनाएँ, समृद्धियों को पलक झपकते ही वापस ला देती हैं।
Tuesday, September 8, 2026
व्यवहारिक तौर पर प्रेम सबकुछ देखता है।
व्यवहारिक तौर पर प्रेम को वो लड़के
कभी प्रकट ही नहीं कर पाए,
जिनके शरीर पर सिले हुए,
सिकुड़े कपड़े और पैरों में टूटी चप्पल थी
क्लासरूम के अंदर,
गरीबी प्यार करने की इजाज़त नहीं देती,
गरीब प्यार करके बस मारा जाता है।
Vinod Kushwaha
A few things from My diary
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मौन और त्रासदी
झीलें, नदियाँ और समुद्र त्रासदी के बाद
फिर वैसे ही शांत होकर बहने लगते हैं,
जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पहाड़ और नदियाँ सिखाती हैं— शांत रहना,
सुकून देना कमजोरी नहीं होता।
शांत सी दिखने वाली हर चीज़ के अंदर एक त्रासदी
छुपी होती है, जो वक़्त बे वक़्त कभी भी प्रलय में तब्दील हो जाती है।
— Vinod Kushwaha —
a few things from my diary.
दुनियां हादसों से ही बनी है
हादसे होना लाज़िम है। दुनियां हादसों से ही बनी है। कई हादसों ने इस दुनियां को अलग अलग रंग जगह पहचान दी है। हर हादसे के बाद दुनियां एक नई सीख के साथ जीना शुरू करती है। जो सबसे अलग होता है। हादसे कुछ मिटा के कुछ नया बनाने का एक प्रक्रिया है जो निरंतर चलती रहेगी। जैसे हम ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिख के सीख के मिटा के कुछ नया लिखते है।
Author: Vinod Kushwaha
A Few Things From My Diary
Monday, September 7, 2026
अतीत लौटने की क्षमता रखता है
अतीत को कुछ पल के लिए भुलाया जा सकता है,
अतीत को त्यागा नहीं जा सकता,
अतीत हमारे स्मृति का जटिल संग्रह है,
ये कोई आर्टिफीशियल डाटा स्टोरेज नहीं है।
अतः अतीत वर्तमान में आता रहेगा। अतीत जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा है।
जिसे भुलाया नहीं जा सकता। भुलाना नामुमकिन है।
Saturday, September 5, 2026
दुनिया की सारी चीजें जो हम खरीदते है वो बस निशानियाँ हैं कि हम कभी जिंदा थे,
मलबे से निकलती लाल साढ़ियाँ, कुर्ते,
चप्पल, बैग्स, मोबाइल, पर्स,
ये वो सब चीज़ें सबूत हैं जिंदा रहने की।
दुनिया की सारी चीजें जो हम खरीदते हैं
वो बस निशानियाँ हैं कि हम कभी जिंदा थे,
जीवन जीने के लिए कुछ भी नहीं है जो जिंदा
रख सके, जीवन कभी भी किसी मलबे का ढेर
बन सकता है।
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