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Thursday, May 15, 2025

UPH प्रश्न-पुस्तिका: किताबों से जुड़ी एक परछाई

 पुराने जगहों पे पुरानी चीजें ही। अतीत को याद दिलाती है। अगर पुरानी चीजें पुरानी जगह से सब कुछ बदल जाए तो। मान लेना चाहिए कि आप वहां कभी गए ही नहीं। क्यों कि वो जगह आपके लिए फिर नया हो जाता है। " जब भी पुरानी जगहों पे पुरानी चीजें दिखती है अतीत सामने आ जाता है। कॉलेज के दिनों में एक प्रश्न उत्तर पुस्तिका एग्जाम से लगभग २ महीने पहले प्रकाशित होती थी। UPH नाम से गोरखपुर यूनिवर्सिटी के लिए। एग्जाम से २ महीने पहले हर बुक स्टाल और छात्रों के हाथों में थम सा जाता था। कोचिंग न करने वाले छात्रों के लिए बहुत बड़ा सहारा था ये। जैसे जैसे एग्जाम खत्म होने के कगार पे आता था। ये धीरे धीरे विलुप्त होने लगता था। लगभग 6.7 सालों बाद मैने इसे एक बुक स्टॉल पर देखा और इसे देखते हुए आगे बढ़ गया, जैसे कभी कभी किसी पुराने परिचित को देखते हुए बिन बोले हम आगे बढ़ जाते है। गोरखपुर जाने के लिए जब में ट्रेन में बैठा तब तक मेरी नजर। कुछ छात्रों पे गई, जिसमें से कुछ छात्र UPH ले के बैठे थे। और कुछ पढ़ रहे थे। अक्सर ट्रेन और बस से आने जाने वाले छात्र  आपको दिख जाएंगे पढ़ते हुए। किसी ट्रेन या बस में, मैने पास में रखी हुई UPH से इक बॉटनी का सीरीज ले के देखा, लिखा था कवर पेज पर। 
गोरखपुर यूनिवर्सिटी,  UPH Question Bank २५ वर्षों से, यूनिवर्सल पब्लिशिंग टेस्ट हाउस गोरखपुर, वही पुरानी लाइन।

 कुछ पेज को पलट के देखने के बाद मुझे ऐसा लगा जैसे किसी पुराने बहुत खास इंसान से मुलाकात हुई हो। यकीन मानिए पुराने इंसान में बदलाव आ सकता है। लेकिन पुरानी किसी वास्तु में नहीं। आप कभी मिल के देखना, किसी वास्तु से पुरानी खिलौने, पुरानी किताबे, पुरानी साइकिल, पुराने कपड़े, या पुराने किसी रास्ते से,  हमे लगता है। अतीत को इंसानों से ज्यादा ये न बोलने वाली चीजें आपको याद दिल देगी। आपका अतीत।

Sunday, July 30, 2023

अल्हड़ सी ख्वाहिशें

वो लड़के/लड़कियाँ जो गाँव की
पगडण्डी से निकलकर नापते
है शहर का रास्ता..
वो लड़के लड़कियाँ जो उधारी पर
काटते हैं अपने दिन, कभी किताबों
के लिए, तो कभी परीक्षा के फॉर्म
के लिए,
वो जो हिचकिचाते हैं माँगने में पैसा माँ
बाबा से समझते हुए घर के हालात।
वो जो सपने पालते है कुछ कठिन। और उनको पुरा करने के लिए जी जान लगा देते हैं। वो जो समोसे पकौड़े और खिलौने की पैसे को इकठ्ठा कर के खरीदते हैं किताबें। ऐ लड़के लड़कियों जब जीतते हैं न। तो सिर्फ वो नहीं जीतेते.
उनके साथ जीतता है उनका गाँव, माँ और बाबा की मजबूरीया' और उनका पूरा संसार अतीत के अंधेरे में इक दीप होती हैं इनकी जीत। और ये जब हारते हैं न तो बिल्कुल शांत से हो जातें हैं। और जीने लगते हैं एकान्त और उदासियां लेकर। कहीं मजदूरी करते हुए उन्हीं अतीतों के साथ की किसी को फिर खिलौने बेच के किताबें न खरीदेंने न पड़े। ऐ  चहरे पे मुस्कान के साथ इक घाव लिये जीते हैं। 

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