(Vinod kushwaha) Born in Eastern UP, a microbiologist by profession and unseen storyteller by soul, I walk where science and literature walk the dusty roads together, weaving unseen stories.
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लोकतंत्र या लाठीतंत्र?
सर फोड़ती लाठिया ये साबित करती हैं। की सता में बैठा शासक कितना क्रूर और तानाशाह हैं।
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छात्रों का संघर्ष बस छात्रों के कमरे की दीवार ही देख पाई है। कहा देख पाती है दुनिया दुनिया का सबसे बड़ा संघर्ष। दुनिया बस देखा है सफल और अस...
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कम पेड़ वाले जंगल जंगल नहीं रहे। कम पानी वाली नदियां नदियां नहीं रही। कुछ पेड़ अब पेड़ के श्रेणी से बाहर हो गए, 100 मीटर से कम पहाड़ अब पहाड...
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हर बार कुछ नया दिखता है। कुछ पुराने के साथ। बच्चे बड़े हो जाते है, बड़े के चेहरे पे झुरिया आ गई होती है। बूढ़े और झुक गए होते है, पौधा पेड़ ...
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