Democracy cannot function under dictatorship,
(Vinod kushwaha) Born in Eastern UP, a microbiologist by profession and unseen storyteller by soul, I walk where science and literature walk the dusty roads together, weaving unseen stories.
Tuesday, July 21, 2026
वो सब मरे जाएंगे जो चुप है।
बेरोजगार, किसान, छात्र, यही लड़ सकते है। हर इंसान के हिस्से की अन्याय की लड़ाई। ये कामकाजी नौकरी पेशे लोग अन्याय के खिलाप कभी नहीं बोलेंगे। अंग्रेजी हुकूमत में भी जिनको काम मिल गया था। वो कभी नहीं बोले अंग्रेजों के खिलाफ। ७०% इंसान को अन्याय तभी दिखता है। जब तक उसके साथ नहीं होता। ३०% लोग क्रांतिकारी होते है। उन्हें अपना पराया नहीं बस अन्याय दिखता है। वो हर अनन्य की चिंगारी पे आवाज बुलन्द करते हैं। ये ३०% लोग सदियों से सदियों तक पैदा होते रहेंगे, और सदियों तक याद किए जाएंगे। हर हिस्से की लड़ाई लड़ने के लिए।
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