कभी प्रकट ही नहीं कर पाए,
जिनके शरीर पर सिले हुए,
सिकुड़े कपड़े और पैरों में टूटी चप्पल थी
क्लासरूम के अंदर,
गरीबी प्यार करने की इजाज़त नहीं देती,
गरीब प्यार करके बस मारा जाता है।
Vinod Kushwaha
A few things from My diary
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