फिर वैसे ही शांत होकर बहने लगते हैं,
जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पहाड़ और नदियाँ सिखाती हैं— शांत रहना,
सुकून देना कमजोरी नहीं होता।
शांत सी दिखने वाली हर चीज़ के अंदर एक त्रासदी
छुपी होती है, जो वक़्त बे वक़्त कभी भी प्रलय में तब्दील हो जाती है।
— Vinod Kushwaha —
a few things from my diary.
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