Tuesday, September 8, 2026

मौन और त्रासदी

झीलें, नदियाँ और समुद्र त्रासदी के बाद
फिर वैसे ही शांत होकर बहने लगते हैं,
जैसे कुछ हुआ ही न हो।

पहाड़ और नदियाँ सिखाती हैं— शांत रहना,
सुकून देना कमजोरी नहीं होता।

शांत सी दिखने वाली हर चीज़ के अंदर एक त्रासदी
छुपी होती है, जो वक़्त बे वक़्त कभी भी प्रलय में तब्दील हो जाती है।

— Vinod Kushwaha —
a few things from my diary.

No comments:

Post a Comment

Popular Post

व्यवहारिक तौर पर प्रेम सबकुछ देखता है।

व्यवहारिक तौर पर प्रेम को वो लड़के कभी प्रकट ही नहीं कर पाए, जिनके शरीर पर सिले हुए, सिकुड़े कपड़े और पैरों में टूटी चप्पल थी क्लासरूम के अं...