Sunday, May 10, 2026

निस्वार्थ

कॉलेज के दिनों मे रात 01:00 बजे तक आटा के लोईयों के साथ मां का इंतजार करते देखा इंतजार बस इसलिए था कि कही रोटियां बन जाए तो ठंडी न हो जाएं। सुबह 4 बजे उठने से पहले मां का 03:00 जगा हुआ पा के यही समझ आया। बच्चों का संघर्ष में कहीं जयादा होता है। उनके मां का संघर्ष जो निस्वार्थ चलता रहता है, बस इसी उम्मीद में की बेटा बड़ा हो जाए तो अच्छे से कमा खा सके। ताप्ती धूप में कड़ी मेहनत करते हुए इंसान को बस मां नहीं देख सकती। बाकि इस दुनिया में किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ता, 

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