Saturday, October 12, 2024

स्मृतियां और लौटते हुऐ लोग

मेट्रो, रेलवे, बस स्टैंड, हर जगह बढ़ते भीड़ ये बता रहे है। की लौटना ही पड़ता है स्मृति में सुकून के लिए एक अंतराल के बाद। 
हर अधूरी कहानी घर लौट रही है। उन्हें याद करते जो छूट गई बरसो पहले। चौक, चौराहा, कॉलेज, स्कूल। खेत, खलिहान, अकेला मकान। वो सारे जो अतीत की स्मृति में सिमट गई है। त्योहारे अक्सर जागृत कर जाती है।अतीत की स्मृति को।

No comments:

Post a Comment

Popular Post

कोर्ट को शोपिंग मॉल समझी औरतें.

बेटी के हाथ पकड़ झूठे केस कर के सालों से रात दिन कचहरियों में बिताने वाले लोग, २ ,२ हजार बेटी से भीख मंगवाने वाले मां, बाप, इतना मेहनत लड़की...