Monday, March 8, 2021

लिबास

एक हम हैं जो अभी भी वही लिबास पहने हुए हैं
रेशो की परतों पर कुछ धूल भी जम चुकी है
यादों की तपिश में कुछ रंग भी हल्का हो गया है
कुछ कड़वी यादो के जख्म धोए तो थे
मगर दाग जाने का नाम ही नहीं लेते
एक रोज कोशिश भी की थी उस लिबास को उतारने की
पर तुम्हारी यादों की हवायें इतनी सर्द थी
की उसे बिना पहने रूह की ठंडक जाती ही न थी
खैर अभी भी वो लिबास मुझे जकड़े हुए है
शायद मुझे आदत नहीं है कमीज़ की तरह रिश्ते बदलने की !!!!

No comments:

Post a Comment

Popular Post

ये चलती साँसें अधूरे सपने ढोती हैं,

देखो उन्हें, जो अचानक चले जाते हैं— किसी हादसे में, एक ही पल में। उनके शांत शरीर के पास मर्सिडीज़ की चाबियाँ, महंगी घड़ियाँ, ब्रांडेड सामान ...