ये उन दिनो की बात है जब मै Bsc मे पढता था सुबह का समय था लगभग 4.30 बजे थे ठंड के मैसम होने के कारण सभी लोग सोये थे मेरे घर से मेरे college की दुरी 18 किमी थी मै अकसर साईकल से ही जाता था 6 बजे से लेकीन उस दिन सुबह मे coaching होने के कारण मै 4 बजे से ही घर से निकला था कुहासे इतने थे कि कुछ दिखाई नही दे रहा था घर से लगभग 5 किमी दुर गया था ये जगह सुन सान पडता था काफी दुर तक घर नही था .. मै जैसे ही वहा पहुचा मुझे लडकी कि चिलाने कि अवाज सुनाई दी मै एका एक रुुक गया फिर पिछे से खटकने कि अवाज आई मै पिछे मुड के देखा तो इक साईकल साइड मे था और...
(Vinod kushwaha) Born in Eastern UP, a microbiologist by profession and unseen storyteller by soul, I walk where science and literature walk the dusty roads together, weaving unseen stories.
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